कल संसद में एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष संसद में प्रधानमंत्री के विरुद्ध अनेक आरोप लगाता है, जिसमें फ्रांस के राष्ट्रपति को भी मिथ्या रूप से उद्धृत करता है, जिस का खंडन स्वयं फ्रांस देश करता है। उसके पश्चात् वह राष्ट्रीय नेता, जो एक सांसद भी है, प्रधानमंत्री के आसन के पास जाता है और प्रधानमंत्री को उठने के लिए कहता है। प्रधानमंत्री ने जब पूछा क्या है? तो बैठे हुए प्रधानमंत्री के सीने से लिपट जाता है। फिर अपने आसन पर आकर अपने साथी सांसद की ओर देखकर आंख मारते हुए हंसता है। यह दृश्य देखकर लोकसभा अध्यक्षा हतप्रभ रह जाती हैं और चेतावनी भी देती हैं। हमने भी यह देख कर घोर लज्जा का अनुभव किया। विभिन्न चैनल इस दृश्य को बार-बार दिखा रहे थे। संसार में यह दृश्य सबने देखा होगा। इस प्रकार की अश्लील और बचकानी हरकतों को देखकर किसी विद्यालय के अध्यापक अपने छात्रों की पिटाई कर सकते हैं। पर ये तो राष्ट्रीय नेता है, जो यह बता रहे हैं कि उनका स्तर क्या है? एक अन्य पार्टी का नेता कहता है कि मेरे दोस्त क्या आँख मारी।


ऐसे नेता जब इस देश पर राज करने का सपना देखते हैं, तो उनके राज करने की कल्पना करके भी सिर लज्जा से झुक जाता है। और भविष्य ऐसा लगता है मानो संसद अश्लीलता, अशिष्टता भरे मनोरंजन और झूठे व चंचल लोगों का अखाड़ा बन कर रह जाएगी और इस देश के बनी हुई छवि सारे विश्व में धूल में मिल जाएगी।

देशवासियो! क्या आप सोचेंगे कि यह हरकत एक 50 साल का कथित युवा नेता करता है, तब आपको सोचना है कि आप देश को किधर ले जाना चाहते हैं? मैं समझता हूँ कि इस नेता को आदर्श मानने वाले वास्तव में इस हरकत को हृदय से स्वीकार नहीं करेंगे वे इस पर लज्जित भी हुए होंगे। परंतु उनमें वह साहस नहीं है, जो सत्य को सत्य कह सकें और ऐसे नेताओं का मोह त्याग कर सकें।


मेरे देशवासियो! हम एक महान्, सुसभ्य, संस्कृत और आदर्श राष्ट्र के रहने वाले हैं। हमारे पूर्वजों ने खून बहाकर के इस देश की संस्कृति और सभ्यता की रक्षा की है। उस संस्कृति को धूल में मिलाने वाली ऐसी हरकतों पर जरा अपना मुंह खोलिए और अपने धर्म और कर्तव्य को पहचानिए। अन्यथा देश आपको क्षमा नहीं करेगा, देश की भावी पीढ़ी लंपटता और असभ्यता के गहरे अंधकार में डूब जाएगी।


-आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक