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#भगवान्_महादेव_शिव_उपदेशामृत (5)


क्षत्रिय का धर्म


क्षत्रिस्य स्मृतो धर्मः प्रजापालनमादितः ।।47।।

क्षत्रिय का सबसे पहला धर्म है प्रजा का पालन करना।


तस्य राज्ञः परो धर्मो दमः स्वाध्याय एव च। अग्निहोत्रपरिस्पन्दो दानाध्ययनमेव च ।।49।।

यज्ञोपवीतधरणं यज्ञो धर्मक्रियास्तथा। भृत्यानां भरणं धर्मः कृते कर्मण्यमोघता ।।50।।

सम्यग्दण्डे स्थितिर्धर्मो धर्मो वेदक्रतुर्क्रियाः। व्यवहारस्थितिर्धर्मः सत्यवाक्यरतिस्तथा ।।51।।

(महाभारत, अनुशासन पर्व, दानधर्म पर्व, अ. 141, गीताप्रेस)


राजा का धर्म है-इन्द्रियसंयम, वेदों का स्वाध्याय, अग्निहोत्र कर्म, दान, अध्ययन, यज्ञोपवीत-धारण, यज्ञानुष्ठान, धार्मिक कार्य का सम्पादन, पोष्यवर्ग का भरण-पोषण, आरम्भ किये हुए कर्म को सफल बनाना, अपराध के अनुसार उचित दण्ड देना, वैदिक यज्ञादि कर्मों का अनुष्ठान करना, व्यवहार में न्याय की रक्षा करना और सत्यभाषण में अनुरक्त होना। ये सभी कर्म राजा के लिये धर्म ही हैं।। 49-51।।


स्वयं को क्षत्रिय समझने वाले तथा वेदमतानुसार राजनेता, प्रशासनिक, न्यायिक, पुलिस अधिकारी आदि यदि धर्मात्मा हैं, तो उन्हें क्षत्रिय कहना योग्य है। ये सभी भगवान् शिव के वचनों पर ध्यान दें। वे विचारें कि-


⚫ क्या वे अपनी इन्द्रियों पर संयम रखने वाले हैं अर्थात् अपने काम, क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष व लोभ पर नियन्त्रण रखने वाले हैं? अथवा भ्रष्टाचार व दुराचार में डूबे हैं?

⚫ क्या वे वेदादि शास्त्रों के ज्ञान-विज्ञान को समझते हैं?

⚫ क्या वे प्रतिदिन हवन करते हैं?

⚫ क्या वे सुपात्रों को दान देते हैं?

⚫ क्या वे ईश्वरोपासना, वृद्धों की सेवा, राष्ट्र के सभी नागरिकों का पालन, पशु-पक्षियों एवं अतिथि विद्वानों का भरण-पोषण करने वाले हैं?

⚫ क्या वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के हित का पूर्ण ध्यान रखते हैं?

⚫ क्या वे दृढ़ संकल्प होकर राष्ट्र की रक्षा के कार्य में निष्काम भाव से संलग्न रहते हैं?

⚫ क्या वे अपराधी को उचित दण्ड अवश्य देते व निरपराध की रक्षा करते हैं?

⚫ क्या वे वैदिक कर्मों का सम्पादन करते हैं?

⚫ क्या वे न्याययुक्त व्यवहार करते हैं अथवा जाति, मजहब, भाषा व क्षेत्र के नाम पर देश को बांटने में रत हैं?

⚫ क्या वे मन, वचन व कर्म से सत्य का पालन करते हैं?


यदि आप ऐसा नहीं करते, तो आपको क्षत्रिय अर्थात् देश का नेता, प्रशासनिक व सुरक्षा अधिकारी वा न्यायाधीश होने का कोई अधिकार नहीं है। आइये-आप सच्चे शिवभक्त बनने हेतु भगवान् शिव के इन उपदेशों पर आचरण करना प्रारम्भ करें।


क्रमशः....


-आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक

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