Search

भगवान् महादेव शिव उपदेशामृत (11)


स्वर्ग मोक्ष का अधिकारी कौन? (2)


आत्महेतोः परार्थे वा नर्महास्याश्रयात् तथा। ये मृषा न वदन्तीह ते नराः स्वर्गगामिनः।। 19।।


श्रीमहेश्वर ने कहा- जो हँसी और परिहास का सहारा लेकर भी अपने या दूसरे के लिए कभी झूठ नहीं बोलते हैं, वे मनुष्य स्वर्गलोक में जाते हैं।। 19।।


वृत्त्यर्थे धर्महेतोर्वा कामकारात् तथैव च। अनृतं ये न भाषन्ते ते नराः स्वर्गगामिनः।। 20।।


जो आजीविका अथवा धर्म के लिए स्वेच्छाचार से भी कभी असत्य भाषण नहीं करते हैं, वे मनुष्य स्वर्गगामी होते हैं।। 20।।


पिशुनां न प्रभाषन्ते मित्रभेदकरीं गिरम्। ऋतं मैत्रं तु भाषन्ते ते नराः स्वर्गगामिनः।। 23।।


जो मित्रों में फूट डालने वाली चुगली की बातें नहीं करते हें, सत्य और मैत्री भाव से युक्त वचन बोलते हैं, वे मनुष्य स्वर्गलोक में जाते हैं।। 23।।


ये वर्जयन्ति परुषं परद्रोहं च मानवाः। सर्वभूतसमा दान्तास्ते नराः स्वर्गगामिनः।। 24।। (महाभारत, अनुशासन पर्व, दानधर्म पर्व, अ. 144, गीताप्रेस)


जो मानव दूसरों से तीखी बातें बोलना और द्रोह करना छोड़ देते हैं, सब प्राणियों के प्रति समान भाव रखने वाले और जितेन्द्रिय होते हैं, वे स्वर्गलोक में जाते हैं।। 24।।


क्रमशः....


-आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक

22 views
© 2018, Vaidic Physics, All Rights Reserved.

Sign Up for Vaidic Physics Updates