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ईश्वरीय वरदान का अपमान क्यों ?


मेरे किसान भाइयो ! आजकल आप अपनी कुछ मांगें मनवाने के लिए सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन करते हुए सड़कों पर दूध फैला रहे हैं। कहीं सब्जी व फलों को भी ऐसे ही बर्बाद किया जाता है। इसे सुन वा देखकर प्रत्येक धार्मिक व्यक्ति का दुःखी होना स्वाभाविक हैं। क्या आप और आपके प्रेरक राजनेता यह जानते हैं कि दूध, अन्न, फल, व शाक आदि में से किसी को भी संसार का कोई बडे़ से बड़ा वैज्ञानिक अपनी प्रयोगशाला में नहीं बना सकता। ये सब परमपिता परमात्मा के अनुपम वरदान हैं। क्या इन वरदानों की दुर्गति करने से ईश्वर का अपमान नहीं होता ! हमें ध्यान रखना चाहिए कि ईश्वरीय अपमान का फल हम नहीं जानते कि कब व कैसे हमें भोगना पड़े? ईश्वर का अपमान अक्षम्य पाप है। क्या आप नहीं जानते कि इस देश में कितने गरीब बच्चों को दूध देखने को भी नहीं मिलता और वे कुपोषित होकर अपने प्राण त्याग देते हैं, इधर दूध की ऐसी दुर्गति ? यह बुद्धिमानी नहीं हैं, बल्कि अधर्म है।

मेरे भाइयो ! इस भूमण्डल में सबसे शुद्ध धन केवल आप और मजदूरों का है, जो अपना रात-दिन पसीना बहाकर कमाते हैं। तब आपको ऐसा अधर्म शोभा नहीं देता। आप अपने प्रेरक नेताओं के संकेत पर ईश्वर का अपमान न करे। इसके साथ ही आप अपनी दयनीय दशा के लिए कौन-कौन उत्तरदायी हैं, यह गम्भीरता से विचारें इसके पश्चात् ही विवेक और शातिंपूर्वक आन्दोलन करें।

- आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक

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