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ईश्वर के अस्तित्व की वैज्ञानिकता - 5


(ख) Eternal Universe इस मत पर हमने एकमात्र प्रश्न यह उठाया था कि कोई भी कण वा क्वाण्टा, जिसमें किसी भी प्रकार का बल अथवा क्रिया विद्यमान होती है, वह अनादि नहीं हो सकता। साथ ही हमने यह भी कहा था कि जो पदार्थ किसी अन्य सूक्ष्मतर पदार्थ के संयोग से बना है, वह अनादि नहीं हो सकता। इसका कारण भी हम इस सिद्धान्त की समीक्षा के समय बतला चुके हैं। अब हम सृष्टि के अनादित्व पर कुछ अन्य ढंग से विचार करते हैं क्या गति अनादि है- ‘सृष्टि' शब्द का अर्थ है- “नाना पदार्थों के बुद्धिपूर्वक - मेल से नवीन-२ पदार्थों की उत्पत्ति का होना’' इस मेल की क्रिया में बल और गति का होना अनिवार्य है। प्रश्न यह है कि क्या जड़ पदार्थ में स्वयं बल अथवा गति का होना सम्भव है? इस सृष्टि में जो भी बल व गति दिखाई पड़ रहे हैं, क्या वे मूलतः उसके अपने ही हैं? इस विषय में महर्षि वेदव्यास का कथन है- ‘प्रवृत्तेश्च (अनुपपत्तेः)’ (व.सू.२.२.२) अर्थात् जड़ पदार्थ में स्वतः कोई क्रिया व गति आदि नहीं हो सकती। उसमें गति व क्रिया को उत्पन्न करने वाला कोई चेतन तत्व अवश्य होता है। हम अपने चतुर्दिक नाना प्रकार की गतियां निरन्तर देखते हैं, जिनमें से किन्हीं वस्तुओं को गति देने वाला चालक दिखाई देता है, तो किन्हीं गतियों का चालक दिखाई नहीं देता। अब हम विचार करते हैं कि कौन-२ से पदार्थ हैं, जिनका चालक दिखाई नहीं देता और कौन-२ से पदार्थ ऐसे हैं, जिनका चालक दिखाई देता है, किंवा दिखाई दे सकता है। हम बस, रेलगाड़ी, कार आदि वाहनों के चालक को प्रत्यक्ष देखते हैं, उनकी इच्छा वा प्रयत्न आदि क्रियाओं को अनुभव करते हैं। हम वाहन की गति को प्रारम्भ करने वाले चेतन वाहन चालक को देखते हैं परन्तु वाहन के इंजन में हो रही क्रियाओं को मात्र ईंधन से उत्पन्न मान लेते हैं। ईंधन वा उससे उत्पन्न ऊर्जा वाहन को कैसे गति देती है, विद्युत बड़े-२ यन्त्रों को कैसे चलाती है, विद्युत चुम्बकीय बल कैसे कार्य करते हैं, ऊर्जा व बल क्या है? इन प्रश्नों का हमें स्पष्ट ज्ञान नहीं है। वर्तमान वैज्ञानिक भी इस बात को स्वीकार करते हैं। #Richard_P_Feynnan लिखते हैं “It is important to realize that in physics today, we have no knowledge of what energy is.” (Lectures on Physics- P. 40) “If you insist upon a precise definition of forceyou will never get it.” (id. P. 147) “Why things remains in motion when they are moving or why there is a law of gravitation was, of course not known.” [id. P.15]

-आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक (वैदिक वैज्ञानिक) ("वेदविज्ञान-अलोक:" से उद्धृत)

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