-अब हम सृष्टि उत्पत्ति के सन्दर्भ में क्यों व किसने प्रश्नों पर क्रमशः विचार करते है(क) #Big_Bang_Theory के सन्दर्भ में -पूर्वोक्त Big Bang Theory में अनेक प्रश्न निम्नानुसार उपस्थित हैं- (१) अनन्त सघन व अनन्त तापयुक्त शून्य आयतन वाले पदार्थ में अकस्मात् विस्फोट क्यों हुआ तथा इसे किसने किया? (२) यदि #Steven_Weinberg के Big Bang पर विचार करें तो, वहाँ भी क्यों व किसने प्रश्न उपस्थित होंगे ही। यदि चेतन नियन्त्रक सत्ता को स्वीकार किया जाये, तो कहा जा सकता है कि उसने किया और जीवों के उपयोग में आने योग्य बुद्धिमत्तापूर्ण सृष्टि का निर्माण करने के लिए विस्फोट किया परन्तु अनीश्वरवादी इसका उत्तर कभी नहीं दे सकते। एक वैज्ञानिक ने मुझसे पूछा कि यदि ईश्वर मानें, तो भी यह प्रश्न उठेगा कि ईश्वर ने अकस्मात् आज से लगभग 13.6 अरब वर्ष पूर्व ही क्यों विस्फोट किया? तो इसके उत्तर में ईश्वरवादी तो उचित उत्तर दे सकता है। चेतन तत्व इच्छा व ज्ञान शक्ति से सम्पन्न होता है। वह किसी कार्य का समय व प्रयोजन अपनी बुद्धि से निश्चित कर सकता है। कोई चिड़िया पेड़ से अमुक समय पर क्यों उड़ी? मैं अमुक समय पर अमुक कार्य क्यों करने बैठा? मैं भूख लगने पर भोजन करूँ वा नहीं करूँ, यह मेरी इच्छा व विवेक का विषय है, यहाँ ‘क्यों’ प्रश्न उचित नहीं है परन्तु वृक्ष से पत्ता क्यों गिरा? बादल अभी क्यों बरसने लगे, पानी नीचे की ओर क्यों बह रहा है? इन प्रश्नों का उत्तर अवश्य देने योग्य है। यहाँ इच्छा एवं विवेक नहीं है। इस कारण ईश्वरवादी Big Bang के समय व प्रयोजन के औचित्य को सिद्ध कर सकता है, अनीश्वरवादी कभी नहीं। मेरे यह कहने का प्रयोजन यह नहीं है कि ईश्वर के द्वारा Big Bang सम्भव है अर्थात् यदि बिग बैंग थ्योरिस्ट ईश्वर की सत्ता को मान लें, तो Big Bang Theory सत्य हो सकती है। नहीं, ईश्वर तत्व भी वर्तमान वैज्ञानिकों वाले Big Bang को सम्पन्न नहीं कर सकता है। Big Bang कैसे होता है? इसका समाधान ईश्वरवाद से भी नहीं मिल सकता है। ईश्वर भी अपने नियमों अर्थात् मूलभूत भौतिकी के नियमों के विरुद्ध कार्य नहीं कर सकता। हमने Big Bang Theory की समीक्षा में दर्शाया है कि इस थ्योरी में भौतिकी के कितने मूलभूत नियमों का उल्लंघन होता है? हाँ, यदि किसी लोक में विस्फोट माना जाये, वह लोक भी अनादि न माना जाये, साथ ही भौतिकी के पूर्वोत नियमों का उल्लंघन न हो, तब ईश्वर द्वारा विस्फोट किया जा सकता है परन्तु उस एक विस्फोट से ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का निर्माण होना सम्भव नहीं है। शून्य से ईश्वर भी सृष्टि की रचना नहीं कर सकता है। सृष्टि रचना के लिए अनादि जड़ उपादान कारण की आवश्यकता अवश्य होती है परन्तु जड़ पदार्थ में स्वयं गति, क्रिया नहीं होती, इस कारण इन्हें उत्पन्न करने में ईश्वर की भूमिका अवश्य होती है। अनन्त पदार्थ (अनन्त तापअनन्त द्रव्यमान) से सान्त ऊर्जा व सान्त द्रव्यमान वाले ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति क्यों होती है? इसका उत्तर अनीश्वरवादी नहीं दे सकता, जबकि ईश्वरवादी इसका उत्तर देते हुए कह सकता है कि ईश्वर अपने प्रयोजनानुसार अनन्त पदार्थ से कुछ पदार्थ को उपयोग में लाकर ब्रह्माण्ड की रचना कर सकता है। जिस प्रकार लोक में कोई व्यक्ति पदार्थ विशेष से कुछ भाग लेकर अपनी इच्छा का प्रयोजनानुसार किसी वस्तु विशेष का निर्माण करने के लिए स्वतंत्र है, उसकी इच्छा वा प्रयोजन पर कोई अन्य व्यक्ति प्रश्न उपस्थित नहीं कर सकता, उसी प्रकार अनन्त पदार्थ से कुछ पदार्थ लेकर परमात्मा सान्त द्रव्यमान व ऊर्जा वाले ब्रह्माण्ड की रचना करता है। हम इस पर यह प्रश्न नहीं कर सकते कि उसके अनन्त पदार्थ का शेष भाग का उपयोग क्यों नहीं किया अथवा अनन्त द्रव्यमान वा ऊर्जा से युक्त ब्रह्माण्ड क्यों नहीं बनाया? वैसे अभी तो यह भी प्रश्न अनुत्तरित है कि ब्रह्माण्ड सान्त है वा अनन्त? हमारी दृष्टि में ब्रह्माण्ड ईश्वर की अपेक्षा सान्त तथा हमारी अपेक्षा अनन्त है। हम जिस पदार्थ को ऐसा समझते हैं कि वह ब्रह्माण्ड बनाने में काम में नहीं आया, वह हमारी अल्पज्ञता ही है। वस्तुतः जो पदार्थ ऐसा है, वह भी ब्रह्माण्ड के संचालन आदि में परोक्ष भूमिका निभाता है। वह पदार्थ ही प्राण, मन, छन्द व मूल प्रकृति के रूप में विद्यमान रहता है। दूसरी बात यह भी है कि प्रारम्भ में द्रव्यमान, ऊर्जा जैसे लक्षण विद्यमान हीनहीं होते। (३) दूर बिखरता हुआ पदार्थ संघनित होना कैसे प्रारम्भ करता है? अनीश्वरवादी दूर भागते हुए पदार्थ के संघनित होने का यथार्थ कारण नहीं बता सकता परन्तु ईश्वरवादी इसका इस प्रकार समाधान कर सकता है कि दूर भागते हुए पदार्थ को ईश्वर सृष्टि सृजन हेतु उससे सूक्ष्म तरंग रूप शक्तिशाली पदार्थ के द्वारा रोककर संघनित कर सकता है अर्थात् संघनन की प्रक्रिया प्रारम्भ कर सकता है।

-आचार्य अग्निव्रत नैष्ठिक (वैदिक वैज्ञानिक) ("वेदविज्ञान-अलोक:" से उद्धृत)

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